रतलाम,
01/Jun/2024,
सभी राजस्व अधिकारी सुनिश्चित करें कि कार्यालय में आने वाले किसान तथा आम नागरिक परेशान नहीं हो, उनके कार्य समय सीमा में होना चाहिए। वर्षा का मौसम आ चुका है, सीमांकन कार्य में बिल्कुल भी ढिलाई नहीं बरती जाए अन्यथा संबंधित तहसीलदार, नायब तहसीलदार के विरुद्ध कार्रवाई में देरी नहीं की जाएगी। राजस्व के अन्य कार्य भी समय सीमा में पूर्ण करें। उक्त निर्देश कलेक्टर श्री राजेश बाथम ने कलेक्ट्रेट में शुक्रवार को संपन्न राजस्व अधिकारियों की बैठक में दिए। इस अवसर पर अपर कलेक्टर श्री आर.एस. मंडलोई, डॉ. शालिनी श्रीवास्तव, संयुक्त कलेक्टर श्री अनिल भाना, एसडीएम श्री मनीष जैन, श्री संजीव पांडे, श्री सुनील जायसवाल, सुश्री राधा महंत तथा तहसीलदार, नायब तहसीलदार उपस्थित थे सीमांकन तथा अन्य राजस्व कार्यो की समीक्षा में कलेक्टर द्वारा अधिकांश नायब तहसीलदारों के कार्य में ढिलाई पाई गई। कलेक्टर ने चेतावनी दी कि समय पर काम पूरा नहीं किया तो एक्शन लेने में विलंब नहीं होगा। लंबित राजस्व प्रकरणों की अधिकांश संख्या रतलाम शहर के पूर्वी तथा पश्चिमी क्षेत्र नायब तहसीलदार जावरा तथा बाजना के नायब तहसीलदारो के यहा पाई गई। समीक्षा में जावरा में लगभग साढे तीन सौ तथा नामली में 100 से अधिक सीमांकन प्रकरण निराकरण के लिए लंबित पाए गए। पिपलोदा में भी बड़ी संख्या में सीमांकन कार्य लंबित पाया गया। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि पहले आओ पहले पाओ के आधार सीमांकन के लिए जो भी व्यक्ति पहले आता है उसका कार्य पहले किया जाए। एसडीएम सैलाना द्वारा बताया गया कि रावटी तथा बाजना क्षेत्र में राजस्व निरीक्षको की कमी से कार्य प्रभावित हो रहा है। कलेक्टर द्वारा अधीक्षक लैंड रिकॉर्ड को निर्देशित किया गया कि युक्तियुक्त ढंग से नियुक्ति करके बाजना रावटी में राजस्व निरीक्षकों की पूर्ति करें। राजस्व प्रकरणों के निपटारे की समीक्षा में जावरा में तीन माह से अधिक अवधि के 51 तथा ताल में 28 प्रकरण पाए गए। बाजना नायब तहसीलदार की स्थिति भी अच्छी नहीं पाई गई। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि 1 वर्ष से अधिक अवधि के कोई भी प्रकरण लंबित नहीं रहे। बैठक में कलेक्टर द्वारा भू अर्जन, राजस्व वसूली, तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों हेतु आवास उपलब्धता, पटवारियो को समयमान वेतनमान तथा लैपटॉप के साथ ही अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर समीक्षा की जाकर आवश्यक निर्देश दिए गए।
रतलाम,
01/Jun/2024,
रतलाम जिले में प्रतिवर्ष 31 मई तंबाकू निषेध दिवस के रूप में मनाया जाता है। प्रभारी सीएमएचओ डॉ. रवि दिवेकर ने बताया कि इस वर्ष की थीम ‘बच्चों को तंबाकू उद्योग के हस्तक्षेप से बचाना’ निर्धारित की गई है इस अवसर पर जिला चिकित्सालय रतलाम से जागरूकता रथ को प्रभारी सीएमएचओ डॉ. रवि दिवेकर, म.प्र. कैंसर सोसायटी के श्री अशोक अग्रवाल, जिला मीडिया अधिकारी श्री आशीष चौरसिया, डिप्टी मीडिया अधिकारी श्रीमती सरला वर्मा, म.प्र.वालेन्ट्री हेल्थएसोसिएशन की श्रीमती मीना जैन, किशोर स्वास्थ्य परामर्शदाता श्रीमती पूजा भाटी, जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक श्री रत्नेश विजयवर्गीय, डॉ. प्रदीप राव, प्रजापिता बह्माकुमारी के श्री राजेन्द्र पोरवाल, श्री किशन भाई, श्रीमती विनिता ओझा, श्रीमती संध्या ओझा, श्री बगदीराम बघेल आदि की उपस्थिति में हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया इस अवसर पर ‘कुछ तो लोग कहेगे’ पुस्तिका एवं पेम्पेलेट का विमोचन किया गया। जागरूकता रथ के माईकिंग द्वारा रतलाम शहर के दो बत्ती क्षेत्र, चांदनी चौक क्षेत्र, अल्कापुरी चौराहे सहित प्रमुख क्षेत्रों में लोगों से तम्बाकू पदार्थों का सेवन त्यागने का अनुरोध किया गया। डॉ. रवि दिवेकर ने बताया कि बच्चे भ्रामक विज्ञापन, सेलीब्रिटी से प्रभावित होकर, तम्बाकू पदार्थों की सहज उपलब्धता, हम उम्र के साथियों से प्ररित होकर तंबाकू के प्रति आकर्षित होते हैं भारत में प्रतिवर्ष 13 से 14 लाख लोगों की मृत्यु तंबाकू सेवन से होने वाली बीमारियों के कारण होती है। म.प्र. में तम्बाकू सेवन की दर 34.2 प्रतिशत है। म.प्र. में 13 से 15 वर्ष के 3.9 प्रतिशत छात्र-छात्राएं किसी ना किसी रूप में तंबाकू पदार्थों का सेवन करते हैं। कोटपा अधिनियम 2003 अनुसार धारा 4 के अंतर्गत सार्वजनिक स्थानों पर धुम्रपान करने पर 200 रूपये तक का जुर्माना करने का प्रावधान है। धारा 5 के अंतर्गत तम्बाकू उत्पादों के विज्ञापन पर प्रतिबंध है । धारा 6 ( अ) के अनुसार अवयस्कों को तम्बाकू उत्पादों के विक्रय पर प्रतिबंध है। धारा 6 (ब) के अनुसार शैक्षणिक संस्थाओं के 100 गज के दायरे में तम्बाकू उत्पादों के विक्रय पर प्रतिबंध है। धारा 7 के अनुसार सभी तम्बाकू उत्पादों पर स्वास्थ्य संबंधी विर्नीदिष्ट चेतावनी अनिवार्य रूप से अंकित होना प्रावधानित है। तम्बाकू पदार्थों के सेवन से कैंसर, हाई ब्ल्ड प्रेशर, स्ट्रेक, नपुंसकता सहित कई स्वास्थ्य समस्याऐं हो सकती हैं इसलिए तम्बाकू का किसी भी रूप में उपयोग नहीं करना चाहिए कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. नरेश चौहान ने बताया कि तम्बाकू छोडने के लिए तम्बाकूयुक्त पदार्थों को अपने आसपास से हटा दें, सुबह टहलनें जाऐं और ऐसे लागों के साथ रहें जो आपकी तम्बाकू की आदत छोडने में मदद करें। धुम्रपान छोडने के 20 मिनिट बाद रक्तचाप सामान्य हो जाता है, कुछ ही दिनों में शरीर में निकोटिन की मात्रा कम हो जाती है। 12 महीनों में ह्रदय रोग का खतरा आधा रह जाता है। बीडी, सिगरेट का हर कश जानलेवा है इसलिए तम्बाकू आज ही छोडें। नशा मुक्ति के लिए परामर्श सेवाऐं प्राप्त करने के लिए टोल फ्री नंबर 1800112356 अथवा 08046110007 पर संपर्क कर सकते हैं, अधिक जानकारी के लिए जिला चिकित्सालय में मनोरोग चिकित्सक डॉ. निर्मल जैन से संपर्क कर निशुल्क परामर्श एवं उपचार प्राप्त कर सकते हैं ।
रतलाम,
01/Jun/2024,
पॉक्सो अधिनियम बच्चों को यौन शोषण के अपराधों से बचाने का प्रावधान है। यह कानून न सिर्फ बालिकाओं के यौन शोषण बल्कि नाबालिग लडकों के साथ भी कोई अश्लील छेड़-छाड़ होती है तो उसे भी अपराध की ही श्रेणी में माना जाएगा। इस अधिनियम के तहत दुष्कर्म की पारंपरिक परिभाषा के अलावा उन कृत्यों को भी दुष्कर्म के संज्ञा दी गई है। जिससे बच्चे के साथ गलत भावना से छेड-छाड़ की जाती है। यदि किसी व्यक्ति का पॉक्सो एक्ट के अन्तर्गत दोष सिद्ध हो जाता है तो उसे अपराधी मानते हुए कड़ी सजा देने का प्रावधान रखा गया है। पॉक्सो एक्ट में संशोधन से पहले अग्रिम जमानत का प्रावधान था। लेकिन संशोधन के बाद आरोपी को अग्रिम जमानत भी नहीं दी जाती अगर आप या आपका कोई जानने वाला यौन शोषण का शिकार हुआ है तो आप पॉक्सों एक्ट के तहत शिकायत दर्ज करा सकते हैं। पहला कदम पुलिस से संपर्क करना और घटना की रिपोर्ट करना है। आप या तो व्यक्तिगत रूप से पुलिस स्टेशन जा सकते हैं या शिकायत दर्ज (Complaint Register) कराने के लिए पुलिस हेल्पलाइन नंबर पर कॉल भी कर सकते हैं। आपको घटना की तिथि, समय और स्थान के साथ-साथ यदि संभव हो तो अपराधी की पहचान जैसे विवरण प्रदान करने की आवश्यकता होगी। पुलिस दुर्व्यवहार के सबूत इकट्ठा करने के लिए पीड़िता की मेडिकल जांच की व्यवस्था करेगी। अगर पुलिस को पता चलता है कि शिकायत पॉक्सो अधिनियम के दायरे में आती है, तो वे प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करेंगे और जांच शुरू करेंगे। पॉक्सो अधिनियम के तहत एक नामित अदालत में मामले की कोशिश की जाएगी। पीड़िता और गवाहों (Witnesses) को कोर्ट में गवाही (Testimony) देनी होगी। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि पॉक्सो अधिनियम पीडित (Victim) और गवाहों की पहचान की सुरक्षा के लिए भी प्रावधान करता है पुलिस इस कानून को लागू करने और ऐसे अपराधों के पीड़ितों के लिए न्याय सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पॉक्सो एक्ट के तहत जब किसी बच्चे के खिलाफ यौन अपराध की शिकायत प्राप्त होती है, तो पुलिस को तुरंत शिकायत दर्ज करेगी । पुलिस पीड़ित या किसी गवाह के बयान को इस तरह से दर्ज करने के लिए जिम्मेदार है जो बच्चे की उम्र, लिंग और मानसिक स्थिति के प्रति संवेदनशील हो। पुलिस को यह सुनिश्चित करेगी कि अपराध के सबूत इकट्ठा करने के लिए शिकायत के 24 घंटे के भीतर पीड़िता की मेडिकल जांच हो। यदि अपराध में उनकी संलिप्तता (Involvement) का उचित संदेह है तो पुलिस के पास आरोपी व्यक्ति को बिना वारंट के गिरफ्तार करने की शक्ति है। पुलिस को जांच और मुकदमे के दौरान सुरक्षा और सहायता प्रदान करने सहित पीड़ित की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। पुलिस को अपराध की गहन जांच करनी चाहिए, अपराध से संबंधित सभी सबूतों को इकट्ठा करना चाहिए और उसे Court में पेश करना चाहिए। पुलिस को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार अभियुक्तों का मुकदमा समयबद्ध तरीके से चलाया जाए और उसमें तेजी लाई जाए। बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के अपराधियों को न्याय दिलाने के लिए पॉक्सो अधिनियम के तहत पुलिस की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है पॉक्सो एक्ट का यह अपराध एक बहुत ही गंभीर अपराध माना जाता है। जिसमें दोषी व्यक्ति को कड़ी से कड़ी सजा दिए जाने का प्रावधान होता है। जो भी व्यक्ति इस अपराध को करने का दोषी पाया जाता है। इस अधिनियम में अपराध की गंभीरता के आधार पर न्यूनतम 3 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। पॉक्सो एक्ट में संशोधन के बाद यह फैसला लिया गया कि अगर कोई 12 साल से कम उम्र की लड़किर्यों के साथ दुष्कर्म का दोषी पाया जाता है तो दोषी व्यक्ति को मौत की सजा दी जा सकती है। यदि किसी व्यक्ति पर नाबालिग बच्चे के साथ यौन शोषण जैसे अपराध करने के तहत मुकदमा दर्ज किया जाता है तो उसे किसी भी प्रकार से जमानत नहीं दी जा सकती।
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