पिपलौदा,
ज़ियाउद्दीन कुरेशी की रिपोर्ट,

पिपलौदा – पुण्य सम्राट जयंतसेन सुरीश्वरजी म.सा.के सुशिष्य मुनिराज डॉ संयमरत्न विजयजी म.सा.एवं मुनिराज श्री भुवनरत्न विजयजी म.सा.का पिपलौदा नगर में पहली बार भव्य मंगल प्रवेश हुआ। श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ धाम प्रचार सचिव प्रफुल जैन ने बताया कि मुनिराज का चल समारोह श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ धाम से प्रारम्भ हुआ जो नगर के मुख्य मार्ग से होते हुए श्री आदिनाथ जैन श्वेताम्बर मंदिर झंडा चोक पहुचा जहाँ मुनिराज ने दर्शन वन्दन का लाभ लिया। जैन जेनेत्तर समाज द्वारा चल समारोह के दौरान जगह जगह गहुली बनाई गई व मुनिराज का आशीर्वाद लिया गया। चल समारोह में श्री संघ,वाटिका,नवयुवक,महिला,तरुण व बालिका परिषद व जैन जेनेत्तर समाजजन उपस्थित थे।
नगर के श्री वर्धमान जैन स्थानक पर आयोजित प्रवचन के दौरान मुनिराज डॉ संयमरत्न विजय जी म.सा ने कहा कि जिस मनुष्य को पैसो का,ज्ञान का,सुंदरता,पद,वैभव व बल आदि का घमंड व अहंकार है वह जीवन मे नीचे की ओर गिरता चला जाता है ये शरीर मिट्टी से बना है और उसका अंत भी इस मिट्टी में ही होना है मनुष्य खाली हाथ आता है और खाली हाथ जाता है जो आभूषण पहने होते है वो भी उतार दिए जाते है फिर किस बात का घमंड करना। मुनिराज ने कहा की सज्जन व्यक्ति कभी भी अपशब्द नही बोलता व दुर्जन व्यक्ति हमेशा बुरे शब्दो का प्रयोग करता इसलिए सज्जन बनो व भक्ति भाव करो भक्ति में ही शक्ति है सच्ची भक्ति से भगवान भी प्रशन्न होते है। तनाव की राह से हटकर हसी की राह पर चलना सीखो क्योंकि हसी खुसी में रहना ही हमारे जीवन की असली संपदा है। मुनिराज ने उपस्थित मातृ शक्तियों से कहा कि हम हमारी सुंदरता के लिए लाखों जतन करते है मेकप व लिपिस्टिक में पैसे बर्बाद करते है व दिन में कई बार आईना भी देखते है हमे अपने चेहरे से नही अपनी आत्मा से सुंदर बनने की आवश्यकता है अस्तित्त्व उसी का कायम रहता है जिन्होंने उसे अपने गुणों से सजाया है। मुनिराज ने कोरोना महामारी पर लिखी कविता के माध्यम से समाजजनों को सावधानी बरतने का संदेश दिया। रात्रि में महिला मंडल द्वारा चोवीसी का आयोजन हुआ। श्री संघ अध्यक्ष बाबूलाल धींग,वाटिका अध्यक्ष शेलेन्द्र कटारिया द्वारा नवकारसी के लाभार्थी पवन जितेंद्र बाबेल परिवार का बहुमान किया। संचालन नवयुवक परिषद के प्रांतीय उपाध्यक्ष राकेश जैन ने किया।
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