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आज के युग में मन्नत के नाम पर मौत का खेल जारी है अंधविश्वास या परंपरा देखिए पुरी खबर,

उज्जैन,

14/Nov/2023

विजय देवड़ा ब्यूरो रिपोर्ट

उज्जैन से 75 किलामीटर दुर स्थित बडनगर तहसील के ग्राम भिडावद मे आज फिर आस्था अनोखी देखने को मिली। गांव में सुबह गाय का पूजन किया गया। पूजन के बाद लोग जमीन पर लेटे और उनके ऊपर से गाये निकाली गई। मान्यता है की ऐसा करने से मन्नते पूरी होती है और जिन लोगो की मन्नत पूरी हो जाती है वे भी ऐसा करते है। परम्परा के पीछे लोगो का मानना है की गाय में 33 करोड़ देवी देवताओ का वास रहता है और गाय के पैरो के निचे आने से देवताओ का आशीर्वाद मिलता है। दरअसल आस्था के नाम पर यहाँ लोगो की जान के साथ खिलवाड़ भी किया जाता हैं। दीपावली पर्व के दूसरे दिन होने वाले इस आयोजन में जो लोग शामिल होते है उन्हें वर्षो पुरानी परम्परा का निर्वाह करना होता है। परम्परा अनुसार लोग पांच दिन तक उपवास करते है और दिपावली के एक दिन पहले गांव के माता मन्दिर में रूककर रात गुजारते है और भजन कीर्तन करते है । दीपावली दूसरे दिन पड़वा पर सुबह पूजन किया जाता है उसके बाद ढोल बाजे के साथ गाँव की परिक्रमा की जाती है । एक और गांव की सभी गायों को एकत्रित किया जाता है और दूसरी तरफ लोग जमीन पर लेटते है। फिर शुरू होती जान जोखिम में डालने वाली अनूठी परम्परा। जहाँ लोगो को लेटाया जाता है उस और गायों को एक साथ छोड़ दिया जाता है। कुछ ही समय मे सारी गाये इन्है अपने पैरो से रोदती हुई इन पर से गुजर जाती है । इसके बाद मन्नत करने वाले उठ खडे होते है और ढोल की धुन पर नाचने लगते है । पुरे गाव मे ख़ुशी का माहौल रहता है। इस द्रश्य को देखने के लिए आस पास के गांवो के लोग भी उत्साह के साथ आते है । खास बात तो यह है कि यहाँ अभी तक कोई घायल नही हुआ है।

 

 

 

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