रतलाम,
28/Apr/2024,
ब्यूरो चिफ कृष्णकांत मालवीय,
रतलाम वही रतलाम पुलिस द्वारा आरोपियों के विरुद्ध की गई कार्यवाही को चुनौती देने वाली याचिका को उच्च न्यायालय द्वारा खारिज कर आरोपियों पर जुर्माना लगाया है। बतादें की सैलाना थाना जिला रतलाम पुलिस द्वारा आगामी 16 जनवरी को बीते तीन माह पहले आरोपी हर्ष वर्धन सिंह गुर्जर व अन्य साथी संदीप जाट द्वारा फरियादी गेंदालाल के साथ लात घुसे से मारपीट करते हुए। फरियादी को चाकू मारकर घायल कर फरियादी से 10,000 रुपए लूट कर भाग गए थे। घटना पर सैलाना थाना पर धारा 323, 324, 294, 392, 394/34 आई.पी.सी. 1980 और 3(2)(वी-ए) और 3(1)(आर)(एस) अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया था। रतलाम पुलिस अधीक्षक राहुल कुमार लोढा के निर्देशन में सैलाना पुलिस द्वारा आरोपियों हर्ष वर्धन सिंह गुर्जर एवं संदीप जाट को गिरफ्तार कर वैधानिक कार्यवाही की गई थी। पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही के विरुद्ध आरोपी हर्ष वर्धन सिंह गुर्जर द्वारा हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसमे पुलिस द्वारा अवैधानिक कस्टडी में रखने का आरोप लगाते हुए। पुलिस के विरुद्ध जुर्माने की मांग की गई थी। जिस पर न्यायालय द्वारा मामले की जांच कर यह पाया गया की आरोपी हर्ष वर्धन सिंह गुर्जर एवं सह आरोपी संदीप जाट द्वारा फरियादी के साथ मारपीट करते हुए। फरियादी को चाकू से घायल कर फरियादी के 10000 रुपए भी लूट लिए थे। जिस पर पुलिस द्वारा कार्यवाही करते हुए। प्रकरण पंजीबद्ध कर आरोपियों को हिरासत में लिया गया था। याचिकाकर्ता हर्ष वर्धन सिंह गुर्जर के विरुद्ध 6 अपराधिक मामले दर्ज होकर आरोपी आपराधिक प्रवृत्ति का बदमाश है। आरोपी हर्ष वर्धन के विरुद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत भी कार्यवाही की गई थी। न्यायालय द्वारा याचिका की जांच में यह पाया की याचिकाकर्ता हर्ष वर्धन द्वारा पुलिस पर दबाव बनाने तथा अपना प्रभाव जमाने के उद्देश्य से पुलिस के विरुद्ध अवैधानिक हिरासत में रखने का आरोप लगाया है। याचिकाकर्ता का यह पहला अपराधिक मामला नहीं है बल्कि इसके अलावा भी याचिकाकर्ता पर मारपीट करने, जान से मारने की धमकी देने आदि के 6 अन्य अपराधिक प्रकरण दर्ज है। अतः यदि न्यायालय द्वारा याचिकाकर्ता को किसी भी प्रकार की राहत प्रदान की जाती है तो यह सीधे तौर पर न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। उच्च न्यायालय द्वारा यह कहा गया की यह याचिका पूर्णतः गलत सोच एवं गलत उद्देश्य से दायर की गई है। यह याचिका खारिज करने योग्य है। इस तरह से गलत उद्देश्य से याचिका दायर करने वाले लोगो को यह एहसास होना चाहिए की न्यायालय में याचिका प्रस्तुत करने का कोई गंभीर कारण होना चाहिए। केवल दबाव बनाने या अपना प्रभाव जमाने के उद्देश्य से याचिका दायर करना बिलकुल भी उचित नहीं है। अतः इसे 2500 रुपए के जुर्माने के साथ खारिज किया जाता है। न्यायालय द्वारा जुर्माने की राशि को 4 सप्ताह के भीतर जमा करने के निर्देश दिए गए है। साथ ही समय सीमा में जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर भूमि कर के रूप में वसूल करने के निर्देश प्रदान किए गए।
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