रतलाम
आपको बता दे की 30 अप्रेल 2026 को जिला प्रशासन की बड़ी कार्यवाही शासकीय भूमि पर अतिक्रमण के मामले में सादाखेड़ी सरपंच पदमुक्त, 6 साल के लिए चुनाव लड़ने पर रोक, जिला पंचायत ने जारी किया आदेश।


मध्य प्रदेश के रतलाम जिले जावरा जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत सादाखेड़ी का मामला समाने आया की रतलाम के जावरा तहसील की ग्राम पंचायत सादाखेड़ी के सरपंच ईश्वरलाल बागरी के खिलाफ शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायतों के बाद एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा और अतिक्रमण के गंभीर मामले में प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। रतलाम जिले की जावरा तहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत सादाखेड़ी के सरपंच ईश्वरलाल बागरी को उनके पद से तत्काल प्रभाव से पृथक (बर्खास्त) कर दिया गया है।




क्या है पूरा मामला ?
शिकायतकर्ता बी.एल. जरानिया ने 16 जनवरी 2026 को शिकायत दर्ज कराई थी कि सरपंच ईश्वरलाल बागरी ने ग्राम सादाखेड़ी में शासकीय भूमि (सर्वे क्रमांक 7, 174, 175, 176) पर अवैध रूप से झोपड़ी बनाकर, नलकूप खनन कर और फसल बोकर अतिक्रमण किया है। यह जमीन सरकारी रिकॉर्ड में चरागाह, रास्ता और नाका के रूप में दर्ज है। तहसीलदार न्यायालय जावरा द्वारा जारी आदेश (क्रमांक 10/अ-68/2025-26) के अनुसार, सरपंच बागरी पर शासकीय भूमि (सर्वे क्रमांक 7, 174, 175, 176) के 0.410 हेक्टेयर हिस्से पर अवैध कब्जा करने का आरोप सिद्ध हुआ है। जांच में पाया गया कि उन्होंने चारागाह और रास्ते की भूमि पर अवैध झोपड़ी का निर्माण किया। नलकूप (बोरवेल) खनन करवाया।फसल बोई और जुताई कर अतिक्रमण किया।



जांच और सरपंच का पक्ष
शिकायत के बाद जिला पंचायत कार्यालय द्वारा सरपंच और सचिव को ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किया गया था।

सरपंच का जवाब :- 13 मार्च 2026 को सरपंच ने अपने जवाब में अतिक्रमण के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने तहसीलदार न्यायालय में विचाराधीन किसी भी प्रकरण की जानकारी होने से भी मना किया।
अधिकारियों की रिपोर्ट :-
जब इस संबंध में तहसीलदार जावरा से जानकारी मांगी गई, तो तथ्यों से पता चला कि सरपंच को पूर्व में जारी नोटिसों की तामीली (सूचना) पहले ही दी जा चुकी थी, जिससे उनका यह कहना गलत साबित हुआ कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं थी।

अंतिम अवसर और आदेश
जिला पंचायत कार्यालय ने सरपंच को अपने समर्थन में साक्ष्य (सबूत) पेश करने के लिए 24 अप्रैल 2026 को अंतिम अवसर दिया था, लेकिन उनकी ओर से कोई नया जवाब या ठोस सबूत पेश नहीं किया गया।

जुर्माना और कानूनी कार्रवाई
इस मामले में मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 248 के तहत उन पर 10,000 रुपये का अर्थदंड लगाया गया है और अतिक्रमण हटाने के आदेश जारी किए गए हैं। साथ ही 6 साल के लिए चुनाव लड़ने पर पाबंदी व प्रशासनिक मर्यादाओं के उल्लंघन को देखते हुए, ‘म.प्र. पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993’ की धारा 40 (1) (क) के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें सरपंच पद से हटा दिया गया है।

निष्कर्ष:
दस्तावेजों और तहसीलदार की रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट पाया गया कि सरपंच को मामले की पूरी जानकारी थी। अब पूर्व में प्रस्तुत जवाबों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जिला पंचायत ने इस मामले में आगे की कार्रवाई हेतु आदेश पारित कर दिया है।


नियमों के अनुसार :-
1) सरपंच ईश्वरलाल बागरी अब किसी भी पंचायत के सदस्य नहीं रह सकेंगे।
2) उन्हें अगले 6 वर्षों की अवधि के लिए निर्वाचन (चुनाव लड़ने) हेतु अयोग्य घोषित कर दिया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। प्रशासन की इस कार्रवाई से क्षेत्र के अन्य अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मच गया है।
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