उज्जैन
कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने ग्रीष्म ऋतु में भू जल स्तर में गिरावट को दृष्टिगत रखते हुए संपूर्ण जिले में अशासकीय एवं निजी नलकूप खनन पर प्रतिबंध लगाया है। आदेशानुसार जिले की सीमा में नलकूप / बोरिंग मशीन संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की अनुमति के बिना प्रवेश नहीं करेंगी (सार्वजनिक सड़कों से गुजर रही मशीन को छोड़कर)।और बिना अनुमति के कोई नया नलकूप खनन नहीं करेगी। बिना अनुमति अवैध रूप से जिले में प्रतिबंधात्मक स्थान पर प्रवेश करने पर मशीन जब्त कर एफआईआर दर्ज की जाएगी। आदेशानुसार समस्त अनुविभागीय अधिकारियों को उनके क्षेत्र के अंतर्गत अपरिहार्य प्रकरणों के लिए एवं अन्य आवश्यक प्रयोजनों के लिए उचित जांच के पश्चात अनुज्ञा के लिए प्राधिकृत किया जाता है। निजी नलकूप एवं अन्य विद्यमान निजी जलस्रोतों का आवश्यकता होने पर सार्वजनिक पेयजल व्यवस्था के लिए अधिग्रहण किया जा सकेगा। उक्त आदेश के उल्लंघन करने पर प्रथम अपराध के लिए पांच हजार रुपए का जुर्माना और पश्चातवर्ती प्रत्येक अपराध के लिए दस हजार रुपए या कारावास से ,जो दो वर्ष तक का हो सकेगा से दंडनीय होगा। उक्त आदेश शासकीय योजनाओं के अंतर्गत किए जाने वाले नलकूप उत्खनन पर लागू नहीं होगा।
उज्जैन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में उज्जैन संभाग तेजी से देश के प्रमुख फूड प्रोसेसिंग हब के रूप में उभर रहा है। राज्य सरकार की औद्योगिक नीतियों और निवेश प्रोत्साहन के परिणामस्वरूप यहां खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित हुआ है। उपलब्ध औद्योगिक आंकड़ों के अनुसार केवल फूड प्रोसेसिंग और एग्रो आधारित उद्योगों में ही लगभग 7300 करोड़ से अधिक का निवेश और 5800 से ज्यादा रोजगार के अवसर बने हैं। संभाग में स्थापित हो रही फूड प्रोसेसिंग इकाइयों ने इस क्षेत्र की पहचान को पूरी तरह बदलने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। पहले जहां यह क्षेत्र मुख्यतः कृषि उत्पादन के लिए जाना जाता था, वहीं अब यहां कृषि आधारित उद्योगों का तेजी से विस्तार हो रहा है।सोयाबीन, आलू, मसाले, दाल और डेयरी उत्पादों पर आधारित उद्योगों की मजबूत श्रृंखला विकसित हो रही है, जिससे उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग और मार्केटिंग तक एक संपूर्ण वैल्यू चेन तैयार हो रही है। इससे न केवल उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है, बल्कि किसानों को भी अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है। उज्जैन संभाग के सातों जिले उज्जैन, देवास, मंदसौर, नीमच, रतलाम, शाजापुर और आगर-मालवा इस औद्योगिक विस्तार का हिस्सा बन रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय संतुलित विकास को भी बल मिल रहा है। इन उद्योगों के स्थापित होने से किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है। फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स को कच्चा माल स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो रहा है, जिससे सोयाबीन, आलू, मसाले और दालों की मांग में तेजी आई है। इससे किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है और उनकी आय में वृद्धि हो रही है। साथ ही, कंपनियां सीधे किसानों से खरीद कर रही हैं, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम हो रही है और किसानों को बाजार से बेहतर जुड़ाव मिल रहा है। इससे मध्यप्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है और राज्य आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
बड़ी कंपनियां दे रहीं बदलाव को नई दिशा
फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में बड़ी कंपनियों की एंट्री ने इस बदलाव को और गति दी है। पेप्सिको इंडिया होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड, मैकेन फूड्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, एआरएफएम फूड्स प्राइवेट लिमिटेड, अमिटेक्स एग्रो प्रोडक्ट प्राइवेट लिमिटेड, विप्पी इंडस्ट्रीज लिमिटेड, आडानी विल्मर लिमिटेड, सोनिक बायोकेम एक्सट्रैक्शन लिमिटेड, सफल फूड्स प्राइवेट लिमिटेड, महाशियन दी हट्टी प्राइवेट लिमिटेड (एमडीएच), आरईएलएसयूएस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और इस्कॉन बालाजी फूड प्राइवेट लिमिटेड जैसी बड़ी और विश्वप्रसिद्ध कंपनियां यहां आ चुकी हैं। इससे उज्जैन को नई पहचान मिली।
स्वदेशी उत्पादों की विदेशों में धूम
देश और राज्य दोनों के लिए यह फूड प्रोसेसिंग हब महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। इससे स्वदेशी खाद्य उत्पादों का उत्पादन बढ़ रहा है और निर्यात को भी बढ़ावा मिल रहा है। खाद्य सुरक्षा मजबूत हो रही है और भारत की वैश्विक बाजार में स्थिति बेहतर हो रही है। साथ ही, यह निवेश राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उज्जैन संभाग अब केवल एक कृषि क्षेत्र नहीं रहा, बल्कि यह औद्योगिक और कृषि आधारित विकास का संतुलित मॉडल बनकर उभर रहा है।
रोजगार के साथ क्षेत्र का समग्र विकास
रोजगार के क्षेत्र में भी इस फूड प्रोसेसिंग हब का बड़ा प्रभाव देखने को मिल रहा है। इन उद्योगों के माध्यम से करीब रोजगार के प्रत्यक्ष अवसरों के साथ परिवहन, वेयरहाउसिंग, पैकेजिंग, कोल्ड स्टोरेज और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में हजारों अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर तैयार हो रहे हैं। इससे स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिलने लगा है, जिससे पलायन में भी कमी आई है और क्षेत्रीय विकास को गति मिली है। यह विकास समग्र आर्थिक समृद्धि की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। फूड प्रोसेसिंग उद्योगों के साथ-साथ संबंधित क्षेत्रों जैसे लॉजिस्टिक्स, शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवा क्षेत्र में भी तेजी से विकास हो रहा है। इससे पूरे संभाग में आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं और जीवन स्तर में सुधार देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का विजन और उद्योगों को बढ़ावा देने वाली नीतियों का परिणाम साफ नजर आता है, जो किसान, उद्योग और रोजगार को एक साथ जोड़ रहे हैं।
फूड प्रोसेसिंग हब की मिल रही पहचान
एमपीआईडीसी उज्जैन के कार्यकारी संचालक श्री राजेश राठौड़ ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में उज्जैन संभाग अब तेजी से “फूड प्रोसेसिंग हब” के रूप में अपनी पहचान बना रहा है और आने वाले समय में यह क्षेत्र मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह पहल न केवल उज्जैन संभाग बल्कि पूरे प्रदेश की समृद्धि का नया अध्याय लिख रही है।
इन कंपनियों के आने से नवीन पहचान स्थापित
मैकेन फूड्स इंडिया प्रा. लि. — फ्रेंच फ्राइज उत्पादन, ₹3800 करोड़ निवेश, 591 रोजगार
पेप्सिको इंडिया होल्डिंग प्रा. लि. — फ्लेवर एवं बेवरेज उत्पादन, ₹1225 करोड़ निवेश, 500 रोजगार
महाशियन दी हट्टी प्रा. लि. — मसाला निर्माण, ₹355 करोड़ निवेश, 300 रोजगार
आरपीएसपीएल प्रा. लि. — व्हिप टॉपिंग एवं क्रीम उत्पादन, ₹230 करोड़ निवेश, 200 रोजगार
विप्पी इंडस्ट्रीज लि. — सोयाबीन ऑयल उत्पादन, ₹210 करोड़ निवेश, 750 रोजगार
अमिटेक्स एग्रो प्रोडक्ट प्रा. लि. — प्रोसेस्ड फूड निर्माण, ₹200 करोड़ निवेश, 400 रोजगार
सफल फूड्स प्रा. लि. — दाल मिल एवं ऑयल उत्पादन, ₹158 करोड़ निवेश, 300 रोजगार
एआरएफएम फूड्स प्रा. लि. — एग्रो फूड पार्क, ₹150 करोड़ निवेश, 500 रोजगार
हरिओम रिफाइनरी — सोया रिफाइनरी, ₹133 करोड़ निवेश, 100 रोजगार
सोनिक बायोकेम एक्सट्रैक्शन लि. — प्रोटीन एवं एग्रो उत्पाद, ₹118 करोड़ निवेश, 407 रोजगार
आदानी विल्मर लि. (नीमच) — सोया एवं वनस्पति तेल उत्पादन, ₹112 करोड़ निवेश, 350 रोजगार
रेल्सस इंडिया प्रा. लि. — फूड इंग्रीडिएंट निर्माण, ₹97 करोड़ निवेश, 185 रोजगार
एवीआई एग्री बिजनेस प्रा. लि. — सोया प्रोसेसिंग, ₹93 करोड़ निवेश, 341 रोजगार
इस्कॉन बालाजी फूड प्रा. लि. — पोटैटो फ्लेक्स उत्पादन, ₹93 करोड़ निवेश, 383 रोजगार
कृति न्यूट्रिशन लि. — सोया उत्पाद निर्माण, ₹59 करोड़ निवेश, 180 रोजगार
मित्तल सोया प्रोटीन प्रा. लि. — सोया उत्पाद निर्माण, ₹54 करोड़ निवेश, 86 रोजगार
पंचमहल दुग्ध उत्पादक संघ — डेयरी उत्पाद निर्माण, ₹44 करोड़ निवेश, 336 रोजगार

रतलाम
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली व राज्य शासन के निर्देशानुसार संपत्तिकर व जलकर के बकायादारों को अधिभार (सरचार्ज) में छूट देने हेतु आज 9 मई शनिवार को नेशनल लोक अदालत के तहत बकाया राशि जमा कराने हेतु नगर निगम कार्यालय में फायर स्टेशन भवन के पास संपत्तिकर व जलकर काउंटर तथा जिला न्यायालय परिसर में शिविर का आयोजन कार्यालयीन समय में किया गया है। आयोजित नेशनल लोक अदालत में सम्पत्ति कर के ऐसे प्रकरण जिनमें कर तथा अधिभार की राशि रूपये 50,000/- (रूपये पचास हजार) तक बकाया होने पर मात्र अधिभार में 100 प्रतिशत की छूट दी जायेगी तथा जलकर के ऐसे प्रकरण जिनमें कर तथा अधिभार की राशि रूपये 10,000/- (रूपये दस हजार) तक बकाया होने पर 100 प्रतिशत की छूट। सम्पत्ति कर के ऐसे प्रकरण जिनमें कर तथा अधिभार की राशि रूपये 50,000/- (रूपये पचास हजार) से अधिक तथा रूपये 1,00,000/- (रूपये एक लाख) तक बकाया होने पर मात्र अधिभार में 50 प्रतिशत की छूट तथा जलकर के ऐसे प्रकरण जिनमें कर तथा अधिभार की राशि रूपये 10,000/- से अधिक तथा रूपये 50,000/- तक बकाया होने पर मात्र अधिभार में 75 प्रतिशत की छूट। सम्पत्ति कर के ऐसे प्रकरण जिनमें कर तथा अधिभार की राशि रूपये 1,00,000/- (रूपये एक लाख) से अधिक बकाया होने पर मात्र अधिभार में 25 प्रतिशत की छूट तथा जलकर के ऐसे प्रकरण जिनमें कर तथा अधिभार की राशि रूपये 50,000/- से अधिक बकाया होने पर मात्र अधिभार में 50 प्रतिशत की छूट। उक्त छूट मात्र एक बार (वन टाईम सेटलमेंट) पर ही दी जायेगी। यह छूट वर्ष 2024-25 तक की बकाया राशि पर ही देय होगी। यह छूट मात्र आज दिनांक 9/5/2026 की नेशनल लोक अदालत के लिये मान्य होगी। नगर निगम द्वारा संपत्तिकर एवं जलकर के बकायादारों से अपील की जाती है कि आज 9 मई 2026 शनिवार को आयोजित एक दिवसीय लोक अदालत के तहत नगर निगम कार्यालय में फायर स्टेशन भवन के पास संपत्तिकर व जलकर काउंटर तथा जिला न्यायालय परिसर में आयोजित शिविर में उपस्थित होकर बकाया राशि जमा कराकर दी जा रही अधिभार (सरचार्ज) में छूट का लाभ उठावें।
रतलाम
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग रतलाम की टीम द्वारा जिले के शिवगढ़ एवं पिपलौदा क्षेत्र में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच हेतु सघन कार्रवाई की गई। शिवगढ़ में घर पर कुल्फी निर्माण कर विक्रय किए जाने की सूचना पर टीम ने ओम साईं मावा कुल्फी, रतलाम रोड शिवगढ़ का निरीक्षण किया। यहां से कुल्फी, चोकोबार कुल्फी एवं मिल्क पाउडर के कुल 3 नमूने जांच हेतु लिए गए। वहीं गंगा आइसक्रीम जूस सेंटर से लस्सी एवं आमरस के 2 नमूने लिए गए। निरीक्षण के दौरान दोनों संस्थानों में साफ-सफाई नहीं पाई गई, जिस पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत इम्प्रूवमेंट नोटिस जारी किए गए।

इसी क्रम में टीम ने पिपलौदा क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए ग्राम बोरखेड़ा स्थित कमलेश जाट की मावा भट्टी का निरीक्षण किया तथा मावे के 2 नमूने लिए। इसके अलावा प्रजापत किराना एवं दूध डेयरी से मिक्स्ड दूध, बेसन, चावल, घी और पोहा के नमूने लिए गए। ग्राम हतनारा स्थित राका किराना से पारस देसी घी एवं आटे के नमूने जांच हेतु संग्रहित किए गए।

जांच के दौरान प्रजापत किराना एवं राका किराना दोनों ही फर्म बिना खाद्य लाइसेंस संचालित पाई गईं। उनके विरुद्ध बिना लाइसेंस संचालन के प्रकरण दर्ज किए गए।सभी नमूनों को जांच के लिए राज्य खाद्य प्रयोगशाला भोपाल भेजा जाएगा। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा अधिकारी कमलेश जमरा एवं प्रीति मंडोरिया द्वारा की गई।

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